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रानी क्लियोपेट्रा के लिए इमेज परिणाम

अनिल सिंह यादव

इतिहास पुरुष राजाओं की बहादुरी, चतुराई, क्रूरता और अय्यासियों के किस्सों से भरा पड़ा है। लेकिन इस क्षेत में कुछ महिला शासकों ने अपने दौर में पुरुषों को बहुत पीछे छोड़ दिया था। जिनमें अफ्रीकी महाद्वीप के दो देशों, मिस्र की चर्चित रानी क्लियोपेट्रा और अंगोला की रानी एनजिंगा एमबांदी के किस्से हमेशा सुर्खियों में रहे।

मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा इतिहास में एक ऐसी रहस्यमय शख्सियत के रूप में दर्ज हैं जिनके रहस्य पर से परदा हटाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे जितनी सुंदर और सेक्सी थीं उससे कहीं ज्यादा वे चतुर, षडय़ंत्रकारी और क्रूर भी थीं। उनके कई पुरुषों से सेक्स संबंध थे। वे राजाओं और सैन्य अधिकारियों को अपनी सुंदरता के मोहपाश में बांधकर उनको ठिकाने लगा देती थी। इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने एक सर्प से खुद को अपने वक्ष स्थल पर कटवाकर आत्महत्या कर ली थी और कुछ मानते हैं कि उनकी मौत मादक पदार्थ के सेवन से हुई थी। क्लियोपेट्रा को दुनिया की सबसे अमीर और सुंदर औरत माना जाता था। वे तीन ताकतवर पुरुषों की प्रतिद्वंद्वी थीं-जूलियस सीजर, मार्क एंथोनी और ऑक्टेवियन। जूलियस सीजर ने उन्हें मिस्र की रानी बनने में मदद की थी। अनेक कलाकारों ने क्लियोपेट्रा के रूप-रंग और उसकी मादकता पर कई चित्रकारी और मूर्तियां गढ़ीं। साहित्य में वे इतनी लोकप्रिय हुईं कि अनेक भाषाओं के साहित्यकारों ने उन्हें अपनी कृतियों में नायिका बनाया। अंग्रेजी साहित्य में तीन नाटककारों- शेक्सपियर, ड्राइडन और बर्नाड शा ने अपने नाटकों में उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं का विस्तार किया। क्लियोपेट्रा पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। क्लियोपेट्रा का संबंध भारत से भी था। वे भारत के गरम मसाले, मलमल और मोती भरे जहाज सिकंदरिया के बंदरगाह में खरीद लिया करती थीं।

मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा इतिहास में एक ऐसी रहस्यमय शख्सियत के रूप में दर्ज हैं जिनके रहस्य पर से परदा हटाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे जितनी सुंदर और सेक्सी थीं उससे कहीं ज्यादा वे चतुर, षडय़ंत्रकारी और क्रूर भी थीं। उनके कई पुरुषों से सेक्स संबंध थे। वे राजाओं और सैन्य अधिकारियों को अपनी सुंदरता के मोहपाश में बांधकर उनको ठिकाने लगा देती थी। इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने एक सर्प से खुद को अपने वक्ष स्थल पर कटवाकर आत्महत्या कर ली थी और कुछ मानते हैं कि उनकी मौत मादक पदार्थ के सेवन से हुई थी। क्लियोपेट्रा को दुनिया की सबसे अमीर और सुंदर औरत माना जाता था। वे तीन ताकतवर पुरुषों की प्रतिद्वंद्वी थीं-जूलियस सीजर, मार्क एंथोनी और ऑक्टेवियन। जूलियस सीजर ने उन्हें मिस्र की रानी बनने में मदद की थी। अनेक कलाकारों ने क्लियोपेट्रा के रूप-रंग और उसकी मादकता पर कई चित्रकारी और मूर्तियां गढ़ीं। साहित्य में वे इतनी लोकप्रिय हुईं कि अनेक भाषाओं के साहित्यकारों ने उन्हें अपनी कृतियों में नायिका बनाया। अंग्रेजी साहित्य में तीन नाटककारों- शेक्सपियर, ड्राइडन और बर्नाड शा ने अपने नाटकों में उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं का विस्तार किया। क्लियोपेट्रा पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं।

क्लियोपेट्रा का संबंध भारत से भी था। वे भारत के गरम मसाले, मलमल और मोती भरे जहाज सिकंदरिया के बंदरगाह में खरीद लिया करती थीं। पांच भाषाओं की ज्ञाता कहते हैं कि क्लियोपेट्रो को पांच भाषाओं का ज्ञान था और वह एक चतुर नेता थीं। यही कारण था कि वे बहुत जल्दी से किसी से भी जुडक़र उसके सारे राज जान लेती थीं और इसी के चलते उनका सैकड़ों पुरुषों से संबंध था। अपने शासन और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए क्लियोपेट्रो को क्या कुछ नहीं करना पड़ा यह बहुत ही रोचक है।फराओ वंश की अंतिम शासक कहते हैं कि क्लियोपेट्रा ने 51 ईसा पूर्व से 30 ईसा पूर्व तक मिस्र पर शासन किया था। वह मिस्र पर शासन करने वाली अंतिम फराओ थीं। वह अफ्रीकी, कॉकेशियस या युनानी थीं, इस पर आज तक शोध जारी है। कहते हैं कि जब क्लियोपट्रा 17 वर्ष की थीं तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। पिता की वसीयत के अनुसार उन्हें तथा उनके छोटे भाई तोलेमी दियोनिसस को संयुक्त रूप से राज्य प्राप्त हुआ और वह मिस्री प्रथा के अनुसार अपने इस भाई की पत्नी होने वाली थीं, लेकिन राज्याधिकार के लिए संघर्ष के परिणामस्वरूप उन्हें राज्य से हाथ धोकर सीरिया भागना पड़ा। क्लियोपेट्रा ने साहस नहीं खोया। उसी समय जूलियस सीजर अपने दुश्मन पोंपे का पीछा करता हुआ मिस्र आया। वहां उसने क्लियोपेट्रा को देखा और वह उसकी सुंदरता और मादक आंखों पर आसक्त हो गया। क्लियोपेट्रा की सुंदरता के जाल में फंसने के बाद वह उसकी ओर से युद्ध कर उसको मिस्र की रानी बनाने के लिए तैयार हो गया। जूलियस सीजर ने तोलेमी से युद्ध किया और तोलेमी मारा गया और क्लियोपेट्रा मिस्र के राज सिंहासन पर बैठीं।

ब्राजीली और पुर्तगाली लेखिका जोस एडुआर्डो अगुआलुसा कहते हैं कि क्वीन एनजिंगा युद्ध भूमि में एक महान योद्धा ही नहीं बल्कि एक महान रणनीतिक और राजनयिक थे। वह पुर्तगालियों के खिलाफ लड़ी और डचों के साथ दोस्ती की। वहीं, जब दूसरे राज्यों से संघर्ष होता था तो वह पुर्तगालियों से मदद ले लेती थीं। फ्रांसीसी दार्शनिक मार्किस दे सादे ने इतालवी मिशनरी गिओवनी कावेजी की कहानियों पर आधारित एक किताब द फिलॉसोफी ऑफद ड्रेसिंग टेबल लिखी है। कावेजी ने दावा किया था कि एनजिंगा अपने आशिकों को साथ सेक्स करने के बाद जलाकर मार देती थी।

मिस्र की प्राचीन प्रथा के अनुसार, वह अपने एक अन्य छोटे भाई के साथ मिलकर राज करने लगीं, किंतु शीघ्र ही उसने अपने इस छोटे भाई को विष दे दिया। क्लियोपेट्रा के आदेश पर उसकी बहन अरसीनोई की भी हत्या कर दी गई। जूलियस सीजर से संबंध माना जाता है कि रोमन सम्राट जूलियस सीजर की रखैल थी। उससे एक पुत्र भी हुआ किंतु रोमनों को यह संबंध किसी प्रकार न भाया। रोमन जनता इस संबंध का विरोध करती रही। इसी रोमन शासक जूलियस सीजर के जनरल मार्क एंथोनी का क्लियोपेट्रा पर दिल आ गया था। वह उसकी सुंदरता से मदहोश हो चला था। क्लियोपेट्रा को जब यह पता चला तो दोनों ने शीत ऋतु एक साथ अलेक्जेंडरिया में व्यतीत की। कहते हैं कि एंथोनी से उनके तीन बच्चे हुए। दस्तावेजों से पता चलता है कि उन दोनों ने बाद में शादी भी की, हालांकि वे दोनों पहले से ही विवाहित थे। एंथोनी के साथ मिलकर उसने मिस्र में अपने संयुक्त रूप से सिक्के भी ढलवाए थे। 44 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर की हत्या के बाद उसके वारिस गाएस ऑक्टेवियन सीजर का एंथोनी ने जब विरोध किया तो उसके साथ क्लियोपेट्रा भी थीं। दोनों ने मिलकर रोमन साम्राज्य से टक्कर लेने की योजना बनाई, लेकिन दोनों को ऑक्टेवियन की फौजों से पराजित होना पड़ा। क्लियोपेट्रा अपने 60 जहाजों के साथ युद्धस्थल से सिकंदरिया भाग आईं। एंथोनी भी उसके पीछे-पीछे भागकर उससे आ मिला। बाद में ऑक्टेवियन के कहने पर क्लियोपेट्रा ने एंथोनी को धोखा दिया।

ऑक्टेवियन के कहने पर वह एंथोनी की हत्या करने के लिए तैयार हो गई। एंथोनी को उसने बहला-फुसलाकर साथ-साथ मरने के लिए तैयार किया और वह उसे समाधि भवन में ले गई जिसे उसने बनवाया था। वहां एंथोनी ने इस भ्रम में कि क्लियोपेट्रा आत्महत्या कर चुकी है, अपने जीवन का अंत कर लिया। क्लियोपेट्रा की मौत एक रहस्य क्लियोपेट्रा ऑक्टेवियन को भी अपने रूप-जाल में फांसकर खुद की जान बचाकर फिर से मिस्र की सत्ता प्राप्त करने की योजना पर कार्य कर रही थीं। किंतु जनश्रुति के अनुसार ऑक्टेवियन क्लियोपेट्रा के रूप-जाल में नहीं फंसा और उसने उसकी एक डंकवाले जंतु के माध्यम से हत्या कर दी। तब वह 39 वर्ष की थीं। लेकिन क्या यह सच है? क्लियोपेट्रा की मौत के बाद मिस्र रोमन साम्राज्य का हिस्सा बन गया। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि उसने एंथोनी को धोखा नहीं दिया। उसने एंथोनी के सामने ही सर्प से डंक लगवाकर आत्महत्या कर ली थी और जब एंथोनी ने देखा कि क्लियोपेट्रा मर गई है तब उसने भी आत्महत्या कर ली, क्योंकि वे जानते थे कि हमें कभी भी ऑक्टेवियन या उसके सैनिक मार देंगे। जर्मनी के एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि प्राचीन मिस्र की विख्यात महारानी क्लियोपेट्रा की मौत सर्पदंश से नहीं, बल्कि अधिक मात्रा में मादक पदार्थों के सेवन से हुई थी। यूनिवर्सिटी ऑफ ट्राइवर के इतिहासकार और प्रोफेसर क्रिस्टॉफ शेफर ने अपने आधुनिक शोध में दावा किया है कि अफीम और हेम्लाक (सफेद फूलों वाले विषैले पौधे) के मिश्रण के सेवन की वजह से उनकी मौत हुई थी। क्लियोपेट्रा का निधन अगस्त 30 ईसा पूर्व में हुआ था और हमेशा से यही समझा जाता रहा है कि उनकी मौत कोबरा सांप के काटने से हुई थी। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि महारानी क्लियोपेट्रा अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर थीं और इस बात की संभावना कम ही है कि उसने मौत के इंतजार में खुद को बदसूरत बनने दिया होगा। मिस्र के अलेक्जेंडरिया शहर का दौरा करने वाले क्रिस्टॉफ ने वहां कई प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों का अध्ययन किया और सर्प विशेषज्ञों की राय ली। उनका कहना है कि क्लियोपेट्रा अपने मिथक को बनाए रखने के लिए मौत के समय भी खूबसूरत बनी रहना चाहती थी।

उन्होंने बताया कि क्लियोपेट्रा ने संभवत: अफीम, हेम्लॉक और अन्य पदार्थों के मिश्रण का सेवन किया होगा। उस काल में इस घोल को चंद घंटों के भीतर पीड़ा रहित मृत्यु के लिए पिया जाता था जबकि सर्पदंश की स्थिति में कई बार प्राण निकलने में कई-कई दिन लग जाते थे। क्लियोपेट्रा कॉकेशियन या अफ्रीकी लंबे समय से माना जाता रहा है कि मिस्र की पूर्व रानी की यूनानी मूल की थीं लेकिन विशेषज्ञों ने उनकी बहन के अवशेषों के आधार पर यह पता लगाया है कि उनके भाई-बहन आधे अफ्रीकी थे। इसका मतलब कि क्लियोपेट्रा यूनानी कॉकेशियन नस्ल की नहीं, बल्कि आधी अफ्रीकी थीं। एक वृत्तचित्र क्लियोपाट्रा पोटे्रट ऑफ ए किलर को प्रदर्शित किया था। इसमें तुर्की के इफेसस स्थित एक मकबरे में मानव अवशेषों की खोजों का विश्लेषण किया गया है। मकबरे का फोरेंसिक तकनीक के साथ मानव विज्ञान और वास्तु शास्त्रीय अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हुए कि इसमें पाया गया कि नरकंकाल क्लियोपेट्रा की बहन राजकुमारी अरसीनोई का अवशेष है।

इस अध्ययन दल का नेतृत्व करने वाले ऑस्ट्रियाई विज्ञान अकादमी के पुरातत्व विज्ञानी हाइक थुयेर ने बताया कि जांच से यह पता चला है कि अरसीनोई की मां एक अफ्रीकी थी। यह खुलासा सचमुच में एक सनसनीखेज बात है, जो क्लियोपेट्रा के परिवार तथा क्लियोपेट्रा और अरसीनोई के बीच रिश्तों पर एक नई रोशनी डालता है।सुंदरता के लिए गधी का दूध इतिहास में क्लियोपेट्रा का जिक्र बेहद खूबसूरत यौवना के तौर पर किया जाता है और इसके लिए वे गधी के दूध का इस्तेमाल करती थीं। वे नहाने के लिए हर रोज करीब 700 गधी का दूध मंगाती थीं जिससे उसकी त्वचा खूबसूरत बनी रहती थी। हालिया हुई खोज में यह बात साबित हुई है। तुर्की में हुए एक अध्ययन के अनुसार, एक शोध के दौरान जब चूहों को गाय और गधी का दूध पिलाया गया तो गाय का दूध पीने वाले चूहे ज्यादा मोटे नजर आए। इससे यह स्पष्ट होता है कि गधी के दूध में गाय के दूध की तुलना में कम वसा होता है, जो हर लिहाज से बेहतर होता है। तो फिर कहीं की भी महारानी हो, वह तो ये पसंद करेगी ही। इसी तरह का किस्सा अफ्रीकी देश अंगोला की रानी एनजिंगा एमबांदी का भी है। जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अफ्रीका में यूरोपीय उपनिवेशवाद के खिलाफ जंग छेड़ी थी। लेकिन कुछ लोग उन्हें एक क्रूर महिला के रूप में भी देखते हैं, जिन्होंने सत्ता के लिए अपने भाई को भी मौत के घाट उतार दिया। यहीं, नहीं वह अपने हरम में रहने वाले पुरुषों के साथ एक बार यौन संबंध बनाने के बाद उन्हें जिंदा जलवा देती थी। लेकिन इतिहासकार एक बात पर राजी होते हैं और वह यह है कि एनिजिंगा अफ्रीका की सबसे लोकप्रिय महिलाओं में से एक हैं।

एमबांदू लोगों की नेता एनजिंगा दक्षिण पश्चिम अफ्रीकी देश एनदोंगो और मतांबा की रानी थी। लेकिन स्थानीय भाषा किमबांदु में एनजिंगा को एनगोला कहा जाता था और यही वो शब्द था जिससे पुर्तगाली लोग इस शब्द को बुलाया करते थे। और ये आखिरकार इस क्षेत्र को अंगोला कहा जाने लगा। इस इलाके को ये नाम तब मिला जब पुर्तगाल के सैनिकों ने सोने और चांदी की तलाश में एनदोंगो पर हमला किया था, लेकिन जब उन्हें सोने और चांदी की खानें नहीं मिली तो उन्होंने ब्राजील में अपने नए उपनिवेश में मजदूरों के साथ व्यापार करना शुरू कर दिया।

एमबांदू लोगों की नेता एनजिंगा दक्षिण पश्चिम अफ्रीकी देश एनदोंगो और मतांबा की रानी थी। लेकिन स्थानीय भाषा किमबांदु में एनजिंगा को एनगोला कहा जाता था और यही वो शब्द था जिससे पुर्तगाली लोग इस शब्द को बुलाया करते थे। और ये आखिरकार इस क्षेत्र को अंगोला कहा जाने लगा। इस इलाके को ये नाम तब मिला जब पुर्तगाल के सैनिकों ने सोने और चांदी की तलाश में एनदोंगो पर हमला किया था, लेकिन जब उन्हें सोने और चांदी की खानें नहीं मिली तो उन्होंने ब्राजील में अपने नए उपनिवेश में मजदूरों के साथ व्यापार करना शुरू कर दिया। एनजिंगा का जन्म इस पुर्तगाली हमले के आठ साल बाद हुआ और उन्होंने अपने पिता किंग एमबांदी किलुंजी के साथ बचपन से ही आक्रमणकारियों के साथ संघर्ष किया। साल 1617 में जब राजा एमबांदी किलुंजी की मौत हो गई तो उनके एक बेटे एनगोला एमबांदी ने सत्ता संभाली। लेकिन उनमें अपने पिता वाला करिश्मा और अपनी बहन एनजिंगा जैसी बुद्धि नहीं थी। एनगोला एमबांदी को जल्द ही ये डर सताने लगा कि उनके अपने ही लोग एनजिंगा की तरफ से उनके खिलाफ षडय़ंत्र कर रहे हैं और इसी डर के चलते एनगोला एमबांदी ने एनजिंगा के बेटे को मौत की सजा देने का ऐलान किया। लेकिन जब नए राजा ने खुद को यूरोपीय आक्रमणकारियों का सामना करने में असफल पाया क्योंकि वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे और भारी जनहानि कर रहे थे। ऐसे में एनगोला एमबांदी ने अपने एक करीबी सहयोगी की सलाह मान ली। इसके बाद राजा एनगोला एमबांदी ने अपनी बहन के साथ सत्ता को बांटने का फैसला किया। पुर्तगाली मिशनरियों से पुर्तगाली भाषा सीखने वाली एनजिंगा एक बेहद प्रतिभाशाली रणनीतिकार थीं।

ऐसे में जब एनजिंगा बातचीत का दौर शुरू करने के लिए लुआंडा पहुंची तो उन्होंने वहां पर काले, गोरे और कई संकर जातियों के लोगों को देखा। एनजिंगा ने ऐसा नजारा पहली बार देखा था लेकिन वो इसकी जगह किसी और चीज को देखकर आश्चर्यचकित रह गईं। दरअसल, गुलामों को एक पंक्ति में खड़ा करके बड़े-बड़े जहाजों में ले जाया जा रहा था। कुछ ही सालों में लुआंडा अफ्रीका में सबसे बड़ा गुलामों का अड्डा बन गया। लेकिन जब वह पुर्तगाली गवर्नर जोआओ कोरिए डे सोउसा के साथ शांति वार्ता करने उनके दफ्तर पहुंची तो एनजिंगा के साथ जो व्यवहार किया गया उस पर इतिहासकारों ने टिप्पणियां की हैं, क्योंकि जब वह वहां पहुंची तो उन्होंने देखा कि पुर्तगाली आरामदायक कुर्सियों पर बैठे हुए हैं और उनके लिए जमीन पर बैठने की व्यवस्था की गई थी। ये देखकर निजिंगा ने एक भी शब्द नहीं कहा और उनकी नजर के इशारे को देखते ही उनका एक नौकर कुर्सी के अंदाज में एनजिंगा के सामने बैठ गया। फिर निजिंगा उसकी पीठ पर बैठ गया और वह गवर्नर के बराबर ऊंचाई पर पहुंच गईं। एनजिंगा ने इस तरह ये बता दिया कि वह बराबरी के स्तर से बातचीत करने आई हैं। बातचीत के लंबे दौर के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए कि पुर्तगाली सेना एनदोंगो को छोडक़र चली जाएंगी और उनकी संप्रभुता को स्वीकार करेंगी। लेकिन इसके बदले में एनजिंगा इस पर तैयार हुईं कि इस क्षेत्र को व्यापारिक रास्तों को बनाने के लिए खुला छोड़ा जाएगा।

पुर्तगाल के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए एनजिंगा ने ईसाई धर्म भी स्वीकार किया जिसके बाद नया नाम एना डे सूजा धारण किया गया। इस वक्त उनकी उम्र 40 साल थी। लेकिन दोनों के बीच बेहतर रिश्ते ज्यादा देर तक नहीं चले और जल्द ही संघर्ष की शुरुआत हो गई। साल 1624 में इनके भाई एक छोटे से द्वीप में जाकर रहने लगे। इसके बाद यहीं उनकी मौत हो गई। एनजिंगा की भाई की मौत को लेकर कई तरह की कहानियां हैं। कुछ लोग कहते हैं कि एनजिंगा ने अपने बेटे की हत्या का बदला लेने के लिए उन्हें जहर दिलवाया। वहीं, कुछ लोग उनकी मौत को आत्महत्या के रूप में भी देखते हैं। लेकिन इस सबके बीच में एमजिंगा एमबांदे ने पुर्तागालियों और कुछ अपने लोगों की चुनौतियों का सामना करते हुए एनदोंगों की पहली रानी बनने का कीर्तिमान बनाकर दिखाया। अंगोला की नेशनल लाइब्रेरी के निदेशक जाओ पेड्रो लॉरेंको के मुताबिक, अफ्रीका में बीते कई युगों से जारी महिलाओं के शोषण के खिलाफ एनजिंगा एमबांदे एक मुखर आवाज की तरह हैं। वह कहते हैं कि उनकी तरह ही कई और हस्तियां हैं जो हमें ये समझने में मदद करते हैं कि अफ्रीका में सत्ता के ढांचे में फिट रहने के बावजूद महिलाओं ने इस महाद्वीप के विकास में योगदान दिया है। कुछ सूत्र कहते हैं कि एनजिंगा का अंदाज एक रानी के मुताबिक क्रूरता से भरा था। उदाहरण के लिए, इमबांगाला योद्धाओं की मदद लेना जो राज्य की सीमा पर रहते थे ताकि अपने प्रतिद्वंद्वियों को डराकर अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके। कई सालों तक अपने राज्य का नेतृत्व करने के बाद एनजिंगा ने अपने पड़ोसी राज्य मुतांबा पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही अपनी सीमाओं की भी ढंग से हिफाजत की।

ब्राजीली और पुर्तगाली लेखिका जोस एडुआर्डो अगुआलुसा कहते हैं कि क्वीन एनजिंगा युद्ध भूमि में एक महान योद्धा ही नहीं बल्कि एक महान रणनीतिक और राजनयिक थे। वह पुर्तगालियों के खिलाफ लड़ी और डचों के साथ दोस्ती की। वहीं, जब दूसरे राज्यों से संघर्ष होता था तो वह पुर्तगालियों से मदद ले लेती थीं। फ्रांसीसी दार्शनिक मार्किस दे सादे ने इतालवी मिशनरी गिओवनी कावेजी की कहानियों पर आधारित एक किताब द फिलॉसोफी ऑफद ड्रेसिंग टेबल लिखी है। कावेजी ने दावा किया था कि एनजिंगा अपने आशिकों को साथ सेक्स करने के बाद जलाकर मार देती थी। रानी एनजिंगा के हरम को चिबदोस कहा जाता था और इसमें रहने वाले पुरुषों को पहनने के लिए महिलाओं के कपड़े दिए जाते थे। यही नहीं, जब रानी को अपने हरम में मौजूद किसी पुरुष के साथ सेक्स करना होता था तो हरम के लडक़ों को आपस में मौत होने तक लडऩा होता था। लेकिन जीतने वाले को जो मिलता था वो और भी ज्यादा खतरनाक होता था। दरअसल, ये होता था कि इन पुरुषों को सेक्स के बाद जलाकर मार दिया जाता था। हालांकि, ये माना जाता है कि कावेजी की कहानियां दूसरे लोगों के दावों पर आधारित हैं। ऐसे में इतिहासकार मानते हैं कि इसके कई और वर्जन भी मौजूद हैं।

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